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Chandrayaan 2

chandrayaan 2



chandrayaan 2 कि हम बात करते हैं चंद्रयान 1 के बाद के बाद chandrayaan-2 को इसरो  इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन इसरो इसका रिसर्च किया है और विकसित किया।
इसे जीएसएलवी सैटेलाइट vehicle 3 dwara launch kiya gaya । किसने एक चंद्र कक्षाएं एक रोवर और एक लैंडर से मिलकर बना हुआ है इन सबको इसरो ने ही बनाया है।भारत में chandrayaan-2 को 22 जुलाई 2019 को श्री हरी कोटा रेंज से भारतीय समय भारतीय समय के हिसाब से 2:43  दोपहर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया। सभी देशों को साबित किया कि भारत अब विश्व गुरु बनने के लिए तैयार हैं। हरिया भारत की छवि को बरकरार रखने के लिए काफी है क्योंकि अभी तक दुनिया के केवल पांच देसी चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करा चुके हैं जिसमें से अमेरिका , रूस, चीन, जापान और यूरोप है और इसके बाद भारत ऐसा छोटा देश है जिसने यह प्रक्रिया पूरी की है।


इस सफलता के बाद पूरी दुनिया भारत को बधाई दे रहा है उसकी सफलता के लिए नतमस्तक है। chandrayaan 2 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था परंतु कुछ तकनीकी खराबी की वजह से उसे अंतिम समय में रोक दिया गया।


लैंडर और रोवर चंद्रमा पर लगभग 70 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पर स्थित दो क्रोतों मनीष सी और सिंपल यस एन के बीच उतरने का प्रयास करता है। और रोवल चंद्रमा की सतह पर चलकर चंद्रमा की परीक्षण करेगा मिट्टी और चट्टान के नमूनों को एकत्र करना था उसके बाद उसे पृथ्वी पर भेजा जाएगा।
और इससे यह भी पता लगाया जाएगा कि चांद पर भूकंप आते हैं कि नहीं पत्थर मन और लूनर डेंसिटी कितनी है रोवर चांद की सतह की रसायनिक जांच भी करेगा।
अब तक दुनिया के केवल 3 देशों नहीं अमेरिका रूस और चीन ने चांद पर अपने यान उतारे हैं।

जिसमें से प्रज्ञान चांद की मिट्टी का रासायनिक विश्लेषण करता वही विक्रम चंद्रमा की झीलों को माफ करेगा अन्य चीजों के अलावा लूना कष्ट में खुदाई भी करेगा।



लोहार लोहार का भजन 27 किलोग्राम है और यह सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होता है इसकी इलेक्ट्रिक पावर जेनरेशन क्षमता 50 वाट है chandrayaan-2 का रोवर प्रज्ञान नाम का 6 पहियों वाला रोबोट वाहन है जो संस्कृत में ज्ञान का अनुवाद करता है।


chandrayaan 2 jaisa ek mushkil मुश्किल मिशन दुनिया को यह साबित कर देगा सुबह तकनीकी मशीनों कामयाब करने में पूरी तरह सक्षम है वह दुनिया में अग्रणी देश और विश्व गुरु बनने के लिए तैयार हैं।
रूस ने भी मदद का वादा किया था
नंबर 2007 में न्यूज़ अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कॉसमॉस ने कहा था कि वह प्रोजेक्ट के साथ काम करेंगे और वह उनको लेंडर देंगे साल 2008 में इस मिशन को सरकार की अनुमति मिल तो गई 2009 में चंदन दो का डिजाइन भी तैयार कर लिया गया जनवरी 2013 में लॉन्चिंग तय करनी थी लेकिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कॉसमॉस नहीं दे पाई।
इसके बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने लेंडर बनाने की पहल की और यह सफलता हासिल भी की करके रख दिया कि हम किसी का के मोहताज नहीं है पर अकेले इस मिशन को पूरा कर सकते हैं।


विक्रम लेंडर चंद्रमा की सतह पर 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक सामान्य तरीके से नीचे उतरा इसके बाद लैंडर का धरती से संपर्क टूट गया विश्लेषकों का कहना है 8 सितंबर को इसरो के चेयर पर्सन डॉक्टर के सिवन ने घोषणा की है कैलेंडर को चंद्रमा की सतह पर बिठा के छवि की मदद से देखा गया है और कहा कि और विटामिन सी कोशिश कर रही लैंड के साथ स्थापित करने में।

और यह भारत की कोशिश का 100% सफलता है जिसे भारत ने करके दिखाया और एक दुनिया में अपनी एक अलग स्थान भी बनाई आज भारत देश हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है और आगे बढ़ रहा है और तेजी से विकसित हो रहा है आज इस chandrayaan-2 की वजह से पूरी दुनिया एक हो गई हमारी भारत की एकता को दर्शाती है और हम विश्व गुरु थे और विश्व गुरु बन कर दिखाएंगे फिर से।

Chandrayaan 2 Chandrayaan 2 Reviewed by Anika Sandeep on September 12, 2019 Rating: 5

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