Vishwakarma Puja
भगवान विश्वकर्मा अद्भुत कला के स्वामी हैं। भगवान विश्वकर्मा की कला उनकी बनाई हुई सृष्टि जिसका कोई तोड़ नहीं है और देखने वाले देखते रह जाते हैं ऐसी उनकी कलम जिन्होंने इस सृष्टि का निर्माण किया इस सृष्टि को सुंदर और देखने योग्य बनाया। भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के निर्माण के साथ-साथ देवी देवताओं के भवनों का निर्माण भी किया भगवान इंद्र के इंद्रप्रस्थ का भी निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया इस सृष्टि में जो कुछ भी अद्भुत दिखता है वह उन्हीं की कला का एक स्वरूप है।
भगवान विश्वकर्मा अपनी कला में शिल्प कला का प्रयोग करते हैं, इसलिए उन्हें शिल्प शास्त्री भी कहा जाता है। इनका वर्णन और इनकी महिमा वेद और पुराणों में भी पाया जाता है आज हम जानते हैं विश्वकर्मा कौन हैं? उन्होंने क्या-क्या निर्माण किए हैं?
विश्वकर्मा जी ने अलग-अलग वस्तुओं का निर्माण किया है अगर हम बात करते हैं सबसे पहले तो सोने की लंका, हस्तिनापुर, स्वर्ग लोक, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, द्वारिका वृंदावन सुदामापुरी, गरुण का भवन, कुबेर पुरी, यमपुरी, स्वर्ग लोक और पाताल का निर्माण किया है।
इसके अलावा देवी देवताओं के अस्त्रों शस्त्रों का भी निर्माण किया है भवन के साथ साथ में इन्होंने अस्त्र और शस्त्र का भी निर्माण किया जिसमें भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान इंद्र के लिए महर्षि दधीचि की अस्थियों से बज्जू बना कर दिया, कुबेर के लिए पुष्पक विमान दानवीर कर्ण के लिए कुंडल और यमराज के लिए काल दंड का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने किया है। भगवान शिवजी का त्रिशूल औरत बना कर दिया है।
विश्वकर्मा जी की पत्नी का नाम आकृति है।
भगवान विश्वकर्मा की पत्नी का नाम आकृति है, लेकिन इसके अलावा उनकी तीन अन्य पत्नियां भी थी जिसमें से रत्ती, प्राप्ति और नंदी। विश्वकर्मा जीके मनु चाकसू सम काम हर्ष विश्वरूप और विकास नाम के 6 पुत्र भी थे इनके अलावा वही स्मृति और संजय नाम की दो पुत्रियां। जिसमें से संज्ञा नाम की पुत्री का विवाह सूर्य से हुआ था जिसकी वजह से सूर्य भगवान भगवान विश्वकर्मा के दमाद हुए।
बृहस्पति जी की बहन बृहस्पति भगवान की बहन भुवाना जी के पुत्र हैं विश्वकर्मा भगवान दुनिया के सबसे पहले इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा को ही कहा जाता है।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा का महत्व
भगवान विश्वकर्मा का पूजा का महत्व हिंदू धर्म में विशेष रूप से मनाया जाता है और यह सभी लोग मानते हैं कि भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि का निर्माण किया है और ब्रह्मा जी के साथ में धर्मपुत्र के रूप में जन्म लिया था। अगर शिल्प ज्ञान तो भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करनी होगी।
विश्वकर्मा जी की पूजा और विधि
सबसे पहले सुबह उठते ही स्नान आदि करने के बाद अपने घर की सफाई करनी चाहिए उसके बाद अपने गाड़ी मोटर दुकान कुछ साफ करना चाहिए उसको अच्छी स्नान करना चाहिए घर मरबे घर में बैठकर भगवान विष्णु जी का ध्यान लगाएं और उस पर पुष्प चढ़ाएं एक कमंडल में पुष्प लेकर पानी ले भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें जमीन पर 8 पंक्तियों वाला कमल बनाएं और उस स्थान पर सात प्रकार का अनाज रखें अनाज को तांबे या मिट्टी के बर्तन में रखें पानी का छिड़काव करें चावल पात्र को समर्पित करते हुए वरुण देव का ध्यान रखें सात प्रकार की मिट्टी सुपारी और दक्षिणा को कलश में डालकर उसे कपड़े से ढक दें भगवान विश्वकर्मा को फूल चढ़ा कर आशीर्वाद ले और आरती उतारे।
Vishwakarma Puja
Reviewed by Anika Sandeep
on
September 16, 2019
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