Guru Nanak Jayanti 2019

गुरु नानक जयंती 2019 और गुरु नानक जयंती क्यों मनाई जाती है?
15 अप्रैल 2016 – 22 सितंबर 1539 सिखों के प्रथम आदि गुरु हैं इनके अनुयाई इना नानक नानक देव जी बाबा नानक और नानक शाह नामों से संबोधित करते हैं।
गुरु नानक साहब दार्शनिक, योगी ,गृहस्थ ,धर्म सुधारक, समाज सुधारक ,कवि ,देशभक्त ,और विश्व बंधु यह सारे गुण इनके अंदर समाहित है।
गुरु नानक जी का जन्म रावी नदी के किनारे तलवंडी नामक गांव में कार्तिक की पूर्णिमा को एक खत्री कुल में हुआ था कुछ विद्वान उनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल को टर्न सिक्स नाइन मानते हैं परंतु प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है अक्टूबर-नवंबर में दिवाली के 15 दिन बाद पड़ती है।

गुरु नानक जी के पिता का नाम मेहता कालू जी का माता का नाम तृप्ता देवी था तलवंडी के नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया उनकी बहन का नाम नाम की था बचपन में इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण थे जो सांसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे पढ़ने लिखने में इनका मन नहीं लगता था और छोटी सी उम्र में ही इनका स्कूल छूट गया।
सहारा समय व आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करते थे बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर गांव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्ति व मानने लगे बचपन के समय से ही इनमें श्रद्धा रखने वालों में इनकी बहन जानकी तथा गांव के शासक राय बुला सकते उनका विवाह बालपन में ही 16 वर्ष की आयु में गुरदासपुर जिले के अंतर्गत लाखों की नामक स्थान के रहने वाले मूला की कन्या शुल्क से हुआ था 32 वर्ष की आयु में इनके प्रथम पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ 4 वर्ष पश्चात दूसरे पुत्र लक्ष्मी दास का जन्म हुआ दोनों लड़कों के जन्म के उपरांत नानक अपने परिवार का भार अपने ससुर पर छोड़कर मर्दाना लेना और रामदास साथियों को लेकर तीर्थ यात्रा के लिए निकल गए यह चारों ओर घूमकर उपदेश करने लगे और उन्होंने चार यात्रा पूरे किए जिनमें भारत अफगानिस्तान भारत के मुख्य मुख्य स्थानों का भ्रमण किया यात्राओं को पंजाबी में उदासियां कहा जाता है।

गुरु नानक जी सर्वे सर्वा भी थे मूर्ति पूजा उन्होंने सनातन माता की मूर्ति पूजा की शैली के विपरीत एक परमात्मा की उपासना का एक अलग मार्ग मानवता को दिया उन्होंने हिंदू धर्म में फैली कुरीतियों का सदैव विरोध किया उनके दर्शन में सूफियों जैसी थी साथ ही उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक स्थितियों पर भी नजर डाली संत साहित्य में नानक उन संतों की श्रेणी में ही जिन्होंने नारी को बड़प्पन दिया।
सिंह के उपदेश का सार यही होता था कि ईश्वर एक है और की उपासना हिंदू मुसलमान दोनों के लिए हैं वह मूर्ति पूजा को अनावश्यक मानते थे हिंदू और मुसलमान दोनों इनके मत का प्रभाव भी पड़ता था।

गुरु नानक जी विज्ञान के उद्देश्य को बांटने के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था और 25 साल तक उनकी यात्रा चलती रही इन 25 सालों में नाना जी ने अपने उद्देश्य बढ़-चढ़कर विचार किया और आखरी में श्री गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्रा 25 साल खत्म कर दी और नाना जी करतारपुर नाम के गांव जो पंजाब में स्थित है वहां पर रहने लगे और बाद में इसी जगह गुरु नानक जी ने अपनी आखिरी सांस ली गुरु नानक जी की मृत्यु के 12 साल बाद भी भाई गुरु दास का जन्म हुआ जो अपने बचपन से ही सीख मिशन से जुड़ गए उन्होंने सिख समुदाय के लिए काफी कुछ किया जैसे कि जगह-जगह सिख समुदाय बनाएं और धर्मशालाएं भी खोलें।
गुरु नानक जयंती भारत और विदेशों में सिखों द्वारा मनाए जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है।
गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
गुरु नानक जयंती का त्यौहार नानकशाही कैलेंडर के अनुसार कटक महीने में आता है।
गुरु नानक जी को सिख धर्म की स्थापना के लिए श्रेय दिया जाता है क्योंकि गुरु नानक देव जी सिखों के प्रथम गुरु थे।

Guru Nanak jayanti2019
Reviewed by Anika Sandeep
on
September 29, 2019
Rating:




No comments:
Post a Comment